शेयर मार्केट क्रैश... 6 दिन में 17000000000000 रुपये स्वाहा, ये 5 कारण बने विलेन
Updated on
12-01-2026 12:34 PM
नई दिल्ली: शेयर मार्केट में लगातार गिरावट जारी है। पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद आज सोमवार को भी मार्केट की शुरुआत गिरावट से हुई। पिछले छह दिनों में निवेशकों के लगभग 17 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। देश और विदेश में अनिश्चितता का माहौल निवेशकों को परेशान कर रहा है। सोमवार सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिर गया और दिन के निचले स्तर 83,043 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में भी 140 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई और यह 25,550 के स्तर से नीचे चला गया।
2 जनवरी को सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर 85,762.01 पर था। तब से अब तक यह 2,718 अंकों से ज्यादा गिर चुका है और सोमवार को इसने 83,043.45 का निचला स्तर छुआ। इसी अवधि में निफ्टी भी लगभग 3% गिर गया और 25,529.05 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट बाजार के लिए पिछले तीन महीनों के सबसे खराब हफ्ते के बाद आई है। निवेशकों की चिंता तब और बढ़ गई जब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर कोई फैसला नहीं आया। इससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
1. ट्रंप का टैरिफ और भारत-अमेरिका ट्रेड डील विश्लेषकों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में देरी से घरेलू कंपनियों के नतीजों को लेकर उत्साह कम हो गया है। अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर चल रहा ड्रामा अमेरिकी प्रशासन के अजीब बयानों से और भी उलझता जा रहा है। इससे बाजार प्रभावित हो रहा है।
2. FII की लगातार बिकवाली विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने पिछले छह दिनों की गिरावट में भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे समय में जब निवेशकों का भरोसा पहले से ही कमजोर है, विदेशी पूंजी की निकासी से बाजार में नकदी की कमी हो गई है। 9 जनवरी शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,769 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। 2 जनवरी को थोड़ी देर के लिए रुकने के बाद, यह उनकी लगातार छठी सत्र की बिकवाली थी।
3. वैश्विक संकेतों का कमजोर होना कमजोर वैश्विक संकेतों ने शेयर बाजार में सतर्कता का माहौल और बढ़ा दिया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर नई चिंताओं के उभरने के बाद निवेशकों का जोखिम लेने का मन कम हो गया है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल द्वारा यह कहे जाने के बाद कि ट्रंप प्रशासन ने उन्हें आपराधिक अभियोग की धमकी दी थी, अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में गिरावट आई, जिससे निवेशक बेचैन हो गए।
4. कच्चे तेल का बढ़ता दबाव कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव का एक और स्रोत बन गई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काराकस में एक सैन्य अभियान में पकड़ने के बाद तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में उछाल आया। ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।5. कमजोर तकनीकी संकेत
तकनीकी संकेतक भी बाजार में नकारात्मक रुझान की पुष्टि कर रहे हैं। प्रमुख सूचकांकों ने महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों को तोड़ दिया है और पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान ने कहा कि पिछले हफ्ते प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट आई। इस दौरान बाजार 20-दिवसीय एसएमए (सिंपल मूविंग एवरेज) से नीचे चला गया, और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। तकनीकी रूप से, साप्ताहिक चार्ट पर एक लंबी मंदी वाली कैंडल बनी है और यह छोटी अवधि के औसत से नीचे कारोबार कर रहा है, जो काफी नकारात्मक है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे रहेंगे, तब तक गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
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