हरियाणा के कारीगरों ने बनाई झांकी
उस दौर में मथुरा के बाद देशभर में रायगढ़ ही ऐसा शहर था, जहां जन्माष्टमी पर मेला लगता था। इसमें शामिल होने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों से भी लोग आते थे। इसमें श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती थी। धीरे-धीरे इस मेले की रंगत और भी निखरती गई, क्योंकि गौरीशंकर मंदिर परिसर में आकर्षक झांकियों को दिखाया जाने लगा। उस दौर में भी सेठ किरोड़ीमल ने चलचित्र झांकियों का प्रदर्शन कराया। झांकियों में लगने वाली मूर्तियों को भी हरियाणा के कारीगरों ने बनाया था।
पूरे महीने चलता था मेला
कहा जाता है कि तब रायगढ़ में महीनेभर तक मेला लगा रहता था। रायगढ़ के जन्माष्टमी मेले के बारे में भले ही आज के युवा इतना नहीं जानते हैं, लेकिन बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि इसका इंतजार लोग सालभर करते थे। चूंकि उस दौर में मनोरंजन के साधन ज्यादा नहीं थे, इसलिए लोग मेले का आनंद लेने के लिए उत्साहित होते थे।
अब भी शहर में 5 दिनों तक लगता है मेला
रायगढ़ शहर में ऐतिहासिक जन्मोत्सव को देखने के लिए अब भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यहां पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी लोग मेला देखने आते हैं। 5 दिनों तक मेला लगता है, जिस वजह से यहां यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।