नई दिल्ली: ईरान युद्ध को दो महीने पूरे हो गए हैं। इस बीच भारत समेत दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से गुजरे हैं। इस संकट के दौरान भारत को रूसी तेल का भी साथ मिला। लेकिन अब स्थिति फिर से बदलती दिखाई दे रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और सप्लाई संकट जारी रहने के बावजूद भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात अप्रैल में घट गया है।
मार्च में जहां भारतीय रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड रूसी तेल खरीदा था, वहीं अप्रैल में इसमें करीब 20% की गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में भारत ने रूस से औसतन 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया। मार्च में यह आंकड़ा लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था।
मार्च में क्यों बढ़ी थी खरीद?
मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण मध्य पूर्व से सप्लाई बाधित हुई थी। ऐसे में भारतीय कंपनियों ने रूस से उपलब्ध फ्लोटिंग कार्गो यानी समुद्र में मौजूद तैयार तेल खेपों की खरीद बढ़ा दी थी। इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिलने से भी खरीद आसान हुई थी।
अप्रैल में क्यों आई गिरावट?
केप्लर (Kpler) के मुताबिक अप्रैल में आयात घटने के पीछे ये 3 प्रमुख वजहें रहीं:
रूस के एक बड़े निर्यात टर्मिनल पर यूक्रेनी हमले से लोडिंग प्रभावित हुई।
मार्च में उपलब्ध फ्लोटिंग कार्गो खत्म हो गए।
कुछ रिफाइनरियों में मेंटेनेंस शटडाउन रहा।
किसने खरीदा सबसे ज्यादा तेल?
अप्रैल में इंडियन ऑयन कॉर्पोरेशन (IOC) रूस से तेल खरीदने वाली सबसे बड़ी भारतीय कंपनी रही। इसने कुल खरीदे गए रूसी तेल का 42 फीसदी अकेले खरीदा। जानें किस कंपनी ने कितना तेल खरीदा:
आईओसी: 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन
रिलायंस इंडस्ट्रीज: 2.63 लाख बैरल प्रतिदिन
भारत पेट्रोलियम: 1.36 लाख बैरल प्रतिदिन
हिंदुस्तान पेट्रोलियम: 83 हजार बैरल प्रतिदिन
नायरा एनर्जी की खरीद में गिरावट
नायरा एनर्जी (Nayara Energy) की खरीद मार्च के 3.15 लाख बैरल प्रतिदिन से गिरकर अप्रैल में काफी कम हो गई। नायरा एनर्जी ने अप्रैल में 28 हजार बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी ने 9 अप्रैल से 35 दिन का मेंटेनेंस शटडाउन शुरू किया।
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