फिर फूटेगा महंगाई का बम, एशिया-यूरोप की बढ़ती मांग से LNG हो सकती है महंगी, भारत पर सीधा असर
Updated on
09-06-2026 01:40 PM
नई दिल्ली: देश में महंगाई एक बार फिर से बढ़ सकती है। दरसअल, एशियाई देशों में गैस की मांग बढ़ रही है। वहीं सर्दियों से पहले यूरोप अपने कम हो चुके गैस भंडार को फिर से भरने में लगा है। ऐसे में वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतों के अगले कुछ महीनों में तीन साल से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। एलएनजी के दाम बढ़ने से कई सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि एशियाई एलएनजी बेंचमार्क कीमत इस साल की तीसरी और चौथी तिमाही में बढ़कर 25 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तक पहुंच सकती है। ऐसे में यह मौजूदा फॉरवर्ड मार्केट स्तरों की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होगी।
साल 2023 में बढ़े थे दाम
अगर रिपोर्ट का यह अनुमान सही साबित होता है, तो एलएनजी की कीमतें साल 2023 की शुरुआत के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएंगी। उस समय यूरोपीय देशों ने रूस से पाइपलाइन गैस की आपूर्ति कम होने के बाद बड़े पैमाने पर एलएनजी की खरीद की थी। वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी का कहना है कि मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में तनाव कम होने की स्थिति में भी एलएनजी की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
भारत में बढ़ने लगी खपत
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी व्यवधान का वैश्विक एलएनजी आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है।
यह मार्ग कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख एलएनजी निर्यातक देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन सहित एशिया के प्रमुख बाजारों में प्राकृतिक गैस की खपत फिर से बढ़ने लगी है।
वहीं, यूरोप पर सर्दियों के मौसम से पहले अपने गैस भंडार को भरने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार मार्च और अप्रैल में वैश्विक एलएनजी आयात कमजोर रहने से आपूर्ति में आई बाधाओं का असर कुछ हद तक कम हो गया था।
हालांकि अब गर्मियों के आगमन और ऊर्जा भंडारण बढ़ाने की बढ़ती जरूरत के कारण मांग फिर से तेज होने लगी है।
गर्मी के कारण भी बढ़ेगी मांग
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जून और जुलाई के दौरान एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। इससे एयर कंडीशनिंग और कूलिंग की जरूरत बढ़ेगी, जिसके चलते एलएनजी की खपत में और तेजी आ सकती है।
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