वैश्विक रुख और कंपनी परिणाम तय करेंगे शेयर बाजारों की दिशा
Updated on
13-02-2022 07:21 PM
मुंबई । भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना के बीच इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। विश्लेषकों ने कहा है कि अभी बाजार में कारोबार एक दायरे में रहेगा। इसके साथ ही निवेशकों की निगाह वैश्विक रुख, मुद्रास्फीति के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। तिमाही नतीजों का अब आखिरी दौर है। रुपए का उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुझान और ब्रेंट कच्चे तेल के दाम भी बाजार को दिशा देंगे। विश्लेषकों ने कहा कि दुनियाभर के बाजार अमेरिका में ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की संभावना के बीच समायोजन का प्रयास कर रहे हैं लेकिन भू-राजनीतिक तनाव की वजह से चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर इस सप्ताह मुद्रास्फीति के आंकड़ें आने हैं और साथ तिमाही नतीजों का अंतिम दौर है। इनसे बाजार की दिशा प्रभावित होगी। कुछ विशेष शेयरों में गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। निवेशकों की निगाह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर विधानसभा चुनावों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी रहेगी। भारतीय बाजारों के लिए एफआईआई का रुख भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि अभी वे जमकर निकासी कर रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयरों में 108.53 करोड़ रुपए डाले हैं। इस माह के दौरान एफआईआई भारतीय पूंजी बाजार से 14,930 करोड़ रुपए की निकासी कर चुके हैं।
सप्ताह के दौरान अडाणी एंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, आयशर मोटर्स, अंबुजा सीमेंट्स, नेस्ले इंडिया, स्पाइसजेट और जेट एयरवेज के तिमाही नतीजे आने हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया के बाद अब निवेशक फेडरल रिजर्व की कार्रवाई को लेकर समझ बनाने का प्रयास करेंगे। फेडरल रिजर्व की बैठक का ब्योरा जारी होने वाला है। इसके अलावा चीन के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर भी निवेशकों की निगाह रहेगी। दलाल-स्ट्रीट के निवेशकों की निगाह घरेलू मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर भी रहेगी। कुल मिलाकर इन घटनाक्रमो की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव रहने के आसार हैं। वृहद मोर्चे पर बाजार सोमवार को औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देगा। इसके अलावा थोक और खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े भी 14 फरवरी को आने हैं। इस सप्ताह बाजार की दिशा वैश्विक रुख और घरेलू मोर्चे पर वृहद आर्थिक आंकड़ों से तय होगी।
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