बैटरी वाली कार सबसे पहले 5
सितंबर 1996 में टेस्ट की गई थी। आज 26 साल बाद भी अमेरिका जैसे विकसित देश
में सिर्फ 2% कारें बैटरी से चलती हैं। कारण- मौजूदा बैटरी महंगी है और
प्रदर्शन भी बेहतर नहीं है। लेकिन, अगर बैटरी में तरल के बजाय ठोस पदार्थ
का इलेक्ट्रोलाइट इस्तेमाल किया जाए तो सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। कीमत
कम होगी। सिर्फ 15 मिनट चार्ज करने पर एक सामान्य कार भी 1000 किमी तक
चलेगी। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी
मौजूदा भारी बैटरियों से 6 गुना शक्तिशाली होंगी नई बैटरियां
अब
सवाल उठता है कि इसमें देरी क्यों हो रही है। इसकी वजह है डेंड्राइट। ठोस
पदार्थ में दरार पड़ने को डेंड्राइट कहते हैं। लेकिन, अब जल्द ही यह समस्या
खत्म होने वाली है। इसी महीने 2 तारीख को कतर की सरकारी कंपनी ने अमेरिकी
कंपनी क्वांटमस्कैप में 3000 करोड़ रुपए का निवेश किया, जो सॉलिड बैटरी बना
रही है। इस कंपनी के सीईओ भारतीय मूल के जगदीप सिंह हैं। क्वांटमस्कैप की
बैटरी 17% सस्ती है। खास बात यह है कि बैटरी ताश की गड्डी जितनी छोटी है।
साथ ही मौजूदा भारी बैटरियों से 6 गुना शक्तिशाली भी है।
इस कंपनी में सबसे बड़ी 20% हिस्सेदारी पोर्शे की है, जिसका फोक्सवैगन कंपनी पर 50.7% नियंत्रण है। यही कंपनी ऑडी, स्कोडा, बेंट्ली, बुगाटी, लेंबोर्गिनी, डुकाटी और पोर्शे जैसी कारें बनाती है। वाल स्ट्रीट में चर्चा है कि इस कंपनी के प्राइवेट निवेशकों में एक नाम बिल गेट्स का भी है।
सिर्फ 15 मिनट चार्ज करने से 80% तक चार्ज होगी
जनवरी
2022 में कंपनी ने एक टेस्ट रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसके अनुसार सॉलिड
बैटरी सिर्फ 15 मिनट चार्ज करने से 80% तक चार्ज हो जाती है। इस 80%
चार्जिंग में 1000 किमी का सफर तय किया जा सकता है। इस बैटरी का परीक्षण 3
चरणों में पूरा हो चुका है। कंपनी का दावा है कि 2025 तक ईवी कारें वैसे ही
आम हो जाएंगी, जैसे आज स्मार्टफोन हैं।