रूसी-ईरानी तेल पर छूट खत्म, होर्मुज की नाकेबंदी, अमेरिका के इस कदम से भारत पर क्या होगा असर?
Updated on
16-04-2026 02:23 PM
नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई छूट खत्म कर दी है। इससे भारत पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि भारत ने हाल में इन देशों से काफी तेल खरीदा था जिससे होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला आयात की काफी हद तक भरपाई हो गई थी। लेकिन खासकर रूस के तेल की खरीद बंद होने से भारतीय रिफाइनर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा बड़ा आयातक है और अपना करीब 90 फीसदी क्रूड आयात करता है।
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने वाइट हाउस में एक ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिका रूसी और ईरानी तेल पर दी गई छूट को रिन्यू नहीं करेगा। यह छूट उस तेल पर दी गई थी जो 11 मार्च से पहले अपलोड किया जा चुका था। रूसी तेल पर दी गई छूट की मियाद शनिवार को खत्म हो चुकी है जबकि ईरानी तेल की मियाद रविवार को खत्म हो रही है। हालांकि ट्रंप सरकार के अधिकारी पहले ही कह चुके थे कि यह छूट रिन्यू नहीं होगी।
भारत की खरीदारी
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवाजाही बंद हो गई थी। दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल और एक तिहाई गैस इसी रास्ते से गुजरती है। भारत का ज्यादातर तेल और गैस इसी रास्ते आता है। इससे भारत में तेल और गैस की स्थिति टाइट हो गई थी। लेकिन अमेरिकी छूट से भारतीय रिफाइनरीज को रूसी तेल खरीदने का मौका मिला और उन्होंने रूस से करीब 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा।
अमेरिका ने रूस-ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई छूट खत्म कर दी है
रूसी तेल की खरीद बंद होने से भारतीय रिफाइनर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
मार्च में भारत ने रूस से रोजाना औसतन 1.98 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा
भारत ने इस महीने डिलीवरी के लिए रूस से करीब 60 मिलियन बैरल तेल खरीदा
इंटेलीजेंस फर्म Kpler के मुताबिक मार्च में भारत ने रूस से रोजाना औसतन 1.98 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा जो जून 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन बैरल रह गया। लेकिन इसकी बड़ी वजह यह है कि नयारा एनर्जी की रोजाना 400,000 बैरल क्षमता वाली रिफाइनरी मेंटनेंस के लिए बंद थी। भारत ने इस महीने डिलीवरी के लिए रूस से करीब 60 मिलियन बैरल तेल खरीदा है।
आगे बढ़ेगी मुश्किल
पिछले साल के अंत में भारत ने अमेरिकी दबाव के कारण रूस से तेल की खरीदारी में कटौती की थी। इस कारण जनवरी की शुरुआत में समुद्र में रूस के अनबिके तेल का मात्रा करीब 155 मिलियन बैरल पहुंच गई थी जबकि पिछले साल के मध्य में यह 93.2 मिलियन बैरल थी। डेटा इंटेलीजेंस फर्म Vortexa के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। अभी रूस का करीब 100 मिलिटन बैरल तेल समुद्र में जहाजों में भरा है। इनमें कुछ कार्गो ऐसे भी हैं जो खरीदे जा चुके हैं।
इस बीच करीब 4 मिलियन बैरल कच्चा तेल भी भारत पहुंचा है। भारत ने ईरान से और तेल खरीदने की बात कही थी। भारत, फिलीपींस और कई अन्य एशियाई देशों ने अमेरिका से छूट की मियाद बढ़ाने का अनुरोध किया था। लेकिन अमेरिका ने उनकी बात नहीं मानी। ईरानी हमले के कारण पहले होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवाजाही प्रभावित हुई थी और अब अमेरिका की नाकेबंदी ने स्थिति और विकट हो गई है।
भारत पर असर
रूसी और ईरानी तेल पर प्रतिबंध से भारत की मुश्किल बढ़ सकती है। रूस भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई है और वह अलग-अलग स्रोतों से तेल आयात कर रहा है। साथ ही एलपीजी सोर्सिंग को भी डाइवर्सिफाई किया गया है। पहले जहां 10 देशों से एलपीजी आयात किया जा रहा था, वहीं अब इन देशों की संख्या 15 पहुंच गई है।
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