डीजल सस्ते में खरीदा और रास्ते में बेच दिया! अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता के शेयरों में गिरावट
Updated on
23-03-2026 03:41 PM
नई दिल्ली: दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता के शेयरों में आज 5 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के कारण कंपनी के शेयरों में यह गिरावट आई। पिछले सत्र में कंपनी का शेयर 672.60 रुपये पर बंद हुआ था और आज 660 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 637 रुपये तक आ गया जो 1 फरवरी के बाद इसका सबसे निचला स्तर है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बांबे हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है जिसमें कहा गया था कि अनिल अग्रवाल की कंपनी को फॉर्म सी के अगेंस्ट हाई-स्पीड डीजल पर छूट का अधिकार नहीं है।
हाई कोर्ट ने पाया था कि वेदांता ने हाई स्पीड डीजल का इस्तेमाल माइनिंग के इतर दूसरे कामों के लिए किया। इसमें ट्रांसपोर्टर्स और प्राइवेट पार्टीज को डीजल की रिसेल शामिल है। कंपनी के टैक्स रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के मुताबिक फ्यूल का इस्तेमाल आयरन ओर की माइनिंग और प्रोसेसिंग के लिए मशीनरी चलाने और उनके मेंटनेंस के लिए किया जाना था।
इनकम टैक्स विभाग की दलील
वेदांता ने गोवा वैट एक्ट और सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट के तहत टैक्स रजिस्ट्रेशन हासिल किया था जिसे समय-समय पर रिन्यू किया गया। लेकिन 2017 में जीएसटी आने के बाद कंपनी नए सिस्टम में माइग्रेट कर गई और लेकिन उसने हाई स्पीड डीजल की खरीद पर सेंट्रल सेल्स टैक्स देना जारी रखा और वैट रजिस्ट्रेशन को भी बरकरार रखा।
टैक्स अधिकारियों ने वेदांता को फॉर्म सी देने से इन्कार कर दिया था। उनका कहना था कि कंपनी सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट के तहत अब डीलर नहीं रह गई है और उसका रजिस्ट्रेशन खत्म हो गया है। टैक्स डिपार्टमेंट ने अपनी दलील में कहा कि वेदांता कर्नाटक से खरीदे गए डीजल के लिए फॉर्म सी का यूज करना चाहती थी ताकि उसे 19 फीसदी वैट न देना पड़े। फॉर्म सी के तहत खरीदे गए डीजल पर केवल दो फीसदी टैक्स लगता है।
कंपनी का मार्केट कैप
कोर्ट ने कहा कि छूट वाला डीजल खरीदने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट केवल माइनिंग मशीनों को चलाने के लिए दिया गया था। यह थर्ड पार्टी ट्रांसपोर्टर्स को रिसेल या सप्लाई के लिए नहीं था। 12.30 बजे कंपनी का शेयर 4.85% की गिरावट के साथ 640 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इसके साथ ही कंपनी का मार्केट कैप 2,50,343.04 करोड़ रुपये रह गया है।
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