बालेन शाह के भारत दौरे पर सस्पेंस के बीच रवि लामिछाने आएंगे दिल्ली, पीएम मोदी से मुलाकात की संभावना, क्या हैं मायने?
Updated on
26-05-2026 12:59 PM
काठमांडू: नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रबी लामिछाने 1 जून से तीन दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब नेपाल और भारत के रिश्तों में हल्का तनाव महसूस किया जा रहा है और दूसरी ओर प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की भारत यात्रा की तारीख अब तक तय नहीं हो पाई है। उनकी यात्रा को लेकर सस्पेंस बना हुआ है और कई रिपोर्ट्स में कहा गया है शायद वो इस साल दिल्ली ना आएं। काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि रबी लामिछाने को दिल्ली दौरे के लिए भारत सरकार की तरफ से न्योता भेजा गया है।
पोस्ट के मुताबिक नई दिल्ली में रबी लामिछाने की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं से हो सकती है। हालांकि नेपाल सरकार और भारत की ओर से अब तक इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नेपाल के राजनीतिक मिजाज को समझने की कोशिश
रबी लामिछाने की यात्रा को कुछ लोग भारत की तरफ से नेपाल की नई राजनीतिक ताकतों को समझने और उनसे सीधे रिश्ते मजबूत करने की कोशिश मान रहे हैं। हाल के चुनावों में RSP ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी और अब पार्टी नेपाल की सत्ता में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा रही है। यही वजह है कि नई दिल्ली अब पारंपरिक दलों के अलावा नई पीढ़ी के नेताओं के साथ भी संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर काम करती दिख रही है।
दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में नेपाल-भारत संबंधों में कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिन्होंने दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ने के संकेत दिए। लिपुलेख सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में आया। इसके अलावा नेपाल सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया जिस पर भारत ने अप्रत्यक्ष नाराजगी जताई थी।
इसी दौरान भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का काठमांडू दौरा भी अचानक टल गया। बताया गया है कि प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह प्रोटोकॉल को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए थे और वह अपने बराबर स्तर से नीचे के अधिकारियों से मुलाकात के पक्ष में नहीं थे। ऐसे माहौल में रबी लामिछाने का भारत दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
रबी लामिछाने के दौरे का एजेंडा क्या है?
पोस्ट के मुताबिक नेपाल सरकार हालांकि लगातार यह कह रही है कि इस यात्रा को प्रधानमंत्री बालेन शाह के संभावित भारत दौरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने साफ कहा कि लामिछाने निजी हैसियत में भारत जा रहे हैं और इसका सरकार की आधिकारिक विदेश नीति से सीधा संबंध नहीं है। इसके अलावा नेपाल विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने 'द पोस्ट' को बताया कि न तो किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इस दौरे की घोषणा की है और न ही RSP की ओर से विदेश मंत्रालय को इस दौरे के इंतजाम के लिए कोई आधिकारिक सूचना मिली हैलेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की राय थोड़ी अलग है। उनका मानना है कि जब किसी राजनीतिक दल का प्रमुख विदेश जाकर सीधे दूसरे देश के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करता है तो उसका राजनीतिक संदेश बेहद बड़ा होता है। खासकर तब जब वही दल सरकार में निर्णायक भूमिका निभा रहा हो। पोस्ट के मुताबिक RSP के दो सांसद बिपिन आचार्य और दीपक बोहरा और साथ ही लामिछाने की पत्नी निकिता पौडेल भी उनके साथ नई दिल्ली जाएंगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निहार नायक ने पोस्ट से कहा कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि भारत और नेपाल के बीच नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत भी हो सकता है। उनके मुताबिक बीजेपी अब नेपाल की नई राजनीतिक ताकतों को करीब से समझना चाहती है क्योंकि आने वाले समय में यही दल नेपाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या रबी लामिछाने का यह दौरा नेपाल-भारत रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने का काम करेगा या फिर यह नेपाल की आंतरिक राजनीति में एक नए शक्ति संतुलन की शुरुआत साबित होगा।
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