खत्म करें LTCG, इससे शेयर बाजार के निवेशक हतोत्साहित होंगे, राघव चड्ढा ने आखिर क्यों की ऐसी मांग
Updated on
10-02-2026 12:15 PM
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा को तो जानते ही होंगे। इनकी शादी बॉलीवुड की अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से हुई है। राघव ने सरकार से शेयर बाजार में निवेश करने वाले आम निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है।
शून्य कर देना चाहिए
राज्यसभा में सोमवार को बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान उन्होंने यह मांग की। उनका कहना है कि LTCG खत्म करने से लोगों की दौलत बढ़ेगी और लोग सोने-चांदी और प्रॉपर्टी में पैसा लगाने के बजाय शेयर बाजार जैसे ज्यादा फायदेमंद कामों में अपना पैसा लगाएंगे। उन्होंने कहा, "हमारे देश में आम निवेशकों के लिए इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को शून्य कर देना चाहिए।"
इससे निवेशक हतोत्साहित होंगे
चड्ढा ने यह भी उल्लेख किया कि बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाया गया है, जिसका असर दूरगामी होगा। एसटीटी को असल में LTCG की जगह लाने के लिए शुरू किया गया था। STT तब लागू हुआ था जब इक्विटी पर LTCG टैक्स जीरो था। इसका मकसद यह था कि चाहे मुनाफा हो या नुकसान, एक सीधा और तुरंत लगने वाला टैक्स निवेशकों को चुकाना होगा। उन्होंने डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ाने का स्वागत किया, लेकिन चेतावनी दी कि STT और LTCG दोनों को बनाए रखने से असली लॉन्ग-टर्म निवेशक हतोत्साहित होंगे।
इन देशों में नहीं लगता LTCG
चड्ढा ने आम निवेशकों के लिए इक्विटी पर LTCG खत्म करने की वकालत करते हुए स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, यूएई, हांगकांग, न्यूजीलैंड, कतर और मलेशिया जैसे देशों का उदाहरण दिया। इन देशों में लॉन्ग-टर्म इक्विटी पर होने वाली कमाई पर ज्यादातर टैक्स नहीं लगता। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चड्ढा ने नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए निवेश की सीमा बढ़ाने की भी तारीफ की। हालांकि, उन्होंने सरकार से यह जांचने का आग्रह किया कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) भारत से बाहर क्यों जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनआरआई निवेश सीमा में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पिछले वित्तीय वर्ष में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने करीब 23 अरब डॉलर निकाल लिए थे।
बजट की आलोचना की
सांसद राघव चड्ढा ने बजट 2026 की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह नौकरीपेशा मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने पब्लिक हेल्थकेयर के लिए कम बजट आवंटन पर भी चिंता जताई।
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