ईरान संकट के बीच धड़ाधड़ वापस आ रहे 19,000 कंटेनर, आखिर क्यों मची है यह खलबली?
Updated on
06-03-2026 03:07 PM
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ने लगा है। ईरान और इजरायल/अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई के कारण पश्चिम एशिया में कई अहम शिपिंग रूट्स बंद हो गए हैं। सुरक्षा कारणों से जहाज भी उस इलाके में जाने से बच रहे हैं। भारत और खाड़ी देशों में काफी ट्रेड होता है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग ब्लॉक है। 2024-25 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $178.56 अरब का रहा था जो भारत के ग्लोबल ट्रेड का 15.42% है। लेकिन पश्चिम एशिया में संकट के कारण बहुत सारा सामान भारतीय बंदरगाहों पर अटका है।
ईटी की एक रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से बताया गया है कि एक्सपोर्टर्स इस सामान को वापस मंगा रहे हैं ताकि उन्हें मोटी फीस न देनी पड़े। बंदरगाहों पर करीब 38,000 कंटेनर अटके हुए हैं जिनमें से लगभग आधे कंटेनर वापस बुलाए जा रहे हैं। इस सामान को स्टोर किया जा रहा है या घरेलू बाजार में बेचा जा रहा है। जल्दी खराब होने वाली चीजों जैसे फल और सब्जियां तथा दवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
2,000 डॉलर का सरचार्ज
अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से पश्चिमी देशों को सामान भेजने में ज्यादा लागत आती है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि एक्सपोर्टर्स कार्गो वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। यह केस-टू-केस बेसिस पर हो रहा है। ईरान का कहना है कि वह केवल अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय जहाजों को निशाना बना रहा है लेकिन एक्सपोर्टर्स और शिपिंग कंपनियां सतर्कता बरत रही हैं। कई शिपिंग कंपनियां शिपमेंट कैंसि कर हैं या भारी सरचार्ज वसूल रही हैं।
पश्चिम एशिया में संकट के कारण कई शिपिंग रूट्स बंद हैं
बंदरगाहों ने शिपमेंट लेना बंद किया, वसूल रहे हैं मोटी फीस
कई एक्सपोर्टर्स को अपना सामान वापस मंगाना पड़ रहा है
एक एक्सपोर्टर ने कहा कि 2,000 डॉलर का सरचार्ज लिया जा रहा है जिससे एक्सपोर्ट घाटे का सौदा बन गया है। फल और सब्जियों का एक्सपोर्ट करने वाले पुणे के एक ट्रेडर ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो फिर सामान को घरेलू बाजार में बेचना पड़ेगा। कोलकाता के एक इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर ने कहा कि उसके चार कंटेनर नवी मुंबई के जेएनपीटी पोर्ट पर फंसे हैं। इनमें से दो कतर के दोहा और दो मिस्र जाने हैं।
क्या कर रही है सरकार?
एक्सपोर्टर ने कहा कि पश्चिम एशियाई मार्केट के लिए बनाए गए सामान को कहीं और नहीं बेचा जा सकता है क्योंकि उनकी स्पेसिफिकेशन अलग होती है। दूसरी समस्या यह है कि डेस्टिनेशन पोर्ट पर डिलीवरी कौन लेगा? यह वजह है कि एक्सपोर्टर्स अपना कार्गो वापस मंगा रहे हैं। डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग ने शुक्रवार को जहाज मालिकों, चार्टर्स, कार्गो ऑनर्स, कंटेनर कैरियर और दूसरे स्टेकहोल्डर्स की मीटिंग बुलाई है।
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